मासूम बचपन और शिक्षा का बोझ

बचपन यह शब्द सुनते ही हर इन्सान के चेहरे पर हल्कि सी मुस्कान आ जाती है और वह अपने बचपन में खो जाता है | आदमी अगर बूढा भी हो जाये तो भी बचपन की एक प्यारी तस्वीर उसकी आँखों के सामने घूम जाती है | कई मर्तबा पीछे बचपन […]

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महँगी पड़ेगी प्रकृति से छेडछाड …………

हमारी  प्रकृति हरियाली ,पर्वत,समुद्र,वन ,नदियाँ,इत्यादि  धरा की  शोभा बढाती है | ये  हमें आनन्दित  और  गौरवान्वित करतीं है |  प्रकृति को संतुलन  में रखने  के लिये  ईश्वर ने सही जगह का चुनाव कर पर्वत ,समुद्र, नदी,इत्यादि का निर्माण किया हैं| पर इन प्राकृतिक चीजों कों मनुष्य अपनी सुविधा के अनुसार […]

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नारी का निर्माण

एक बच्चे ने अपनी माँ को रोते देखा तो पापा से पुछा माँ क्यो रोती है.?? पापा ने जवाब दिया सारी औरते बिना बात के रोती है.. बच्चा कुछ समझ ना पाया और वो बड़ा हो गया. एक दिन उसने भगवान से पूछा कि औरते क्यो रोती है बिना बात […]

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हिन्दू धर्म-संस्कृति की वैज्ञानिकता

हिन्दू धर्मं और संस्कृति अनादिकाल से चली आ रही है और यह कितना सत्य है अब इसे देश विदेश के वैज्ञानिक भी प्रमाणित कर चुके हैं |हिन्दू धर्मं संस्कृति की  प्राचीनता का एहसास हमें पुरातत्त्व विभाग की नई नई खोजों से पता चल रहा है | वैसे तो सभी धर्म आदरणीय […]

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ग्रामीण नारी और सामाजिक रीतियाँ

आज हम इकसवीं सदी में जी रहे हैं और महिलाएं हर विभाग में पुरुष से कंधे से कन्धा मिला कर चल रही हैं | कुछ छेत्रों में तो महिलायें पुरुषों से भी आगे निकल गयीं हैं पर आज भी गांव की नारी अठारवीं शताब्दी में ही जीने को विवश है […]

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